गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

चाइना बनाने जा रहा है महाशक्ति

Hirawati wale
अमेरिका पिछडने लगा सुपर पावर कि पोजीशन से
कोरोना वाइरस की वजह से क्या अमेरिका सुपर पावर नही रहेगा? आज हम आपको इस लेख से बतायेंगे कि चीन कैसे दुनिया पर राज करने की तैयारी कर रहा है, कैसे दुसरे देशों को अपने कर्ज मे जकङ कर उनको गुलाम बनाने की कोशिश कर रहा है।
दरअसल अमेरिका इस समय करोना का कहर सह नहीं पा रहा है जबकि वह एक सुपर पावर है इसके विपरीत चीन अपनी रणनीति के दम पर दुनिया को कोरोना कि हर राहत सामग्री उपलब्ध करवा रहा है।
आप इस विडियो के माध्यम से चाइना की पुरी चालाकी जान जाएंगे 

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

चुनाव आयोग ने कहा कि


Navodaya Times

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#Delhi Results Live: दिल्ली में तीसरी बार केजरीवाल सरकार! AAP भारी जीत की ओर
Updated 18 hours, 50 minutes ago
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली में बिजली, पानी, शिक्षा और विकास को अपना चुनावी मुद्दा बनाने वाली आम आदमी पार्टी मंगलवार सुबह से चल रही मतगणना के रुझानों में बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है और इसके लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के संकेत हैं। निर्वाचन आयोग के आकड़ों के मुताबिक आम आदमी पार्टी (आप) 70 में से 58 सीटों पर, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 12 सीटों पर आगे चल रही है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव ऐसे वक्त हुए थे जब दिल्ली सहित देश भर में संशोधित नागरिकता कानून ,राष्ट्रीय नागरिक पंजी और राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे। भाजपा पर ‘विभाजनकारी’ राजनीति करने के आरोप लगे थे और राष्ट्रीय राजधानी के शाहीन बाग क्षेत्र में 50 दिन से चले रहे महिलाओं के प्रदर्शन का मुद्दा उठाने के लिए उस कर मतदाताओं के ध्रुवीकरण का आरोप लगा था।

चुनाव में एक ओर भाजपा का प्रचार जहां राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर केन्द्रित था वहीं आप ने अपना प्रचार शिक्षा ,स्वास्थ्य और मूलभूत ढांचे पर केन्द्रित रखा था। नए रुझान के अनुसार आप प्रमुख एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नयी दिल्ली विधानसभा सीट पर 6,300 मतों से आगे चल रहे हैं।



Live Updates:

- पटपड़गंज सीट से डिप्टी CM मनीष सिसोदिया जीते



Party Name Lead win
AAP 62 00
BJP+ 08 00
Cong+ 00 00
Others 00 00


परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत नजफगढ़ से 1,115 मतों से आगे चल रहे हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन शकूरबस्ती से भाजपा के एस सी वत्स से 309 मतों से आगे चल रहे हैं। श्रम मंत्री गोपाल राय बाबरपुर निर्वाचन क्षेत्र से आगे चल रहे हैं। वहीं बल्लीमारान क्षेत्र से आप के इमरान हुसैन आगे चल रहे हैं। केजरीवाल की अगुवाई में पिछले चुनाव में आप ने दिल्ली की 70 में से 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी। केजरीवाल शाम को पार्टी कार्यकर्ताओं और मीडिया से बात कर सकते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं में गजब का उत्साह है।

आप प्रवक्ता संजय सिंह ने संवाददताओं से कहा, ‘हम शुरुआत से ही कह रहे थे कि आगामी चुनाव हमारे किए काम के आधार पर लड़ा जाएगा। अभी कुछ कहना बहुत जल्दबाजी होगी। आप इंतजार कीजिए और देखिए कि हम जबरदस्त जीत हासिल करेंगे।’

इस बीच पार्टी मुख्यालय को सफेद और नीले रंग के गुब्बारों से सजाया गया है और कार्यालय के विभिन्न हिस्सों में केजरीवाल की तस्वीरें लगाई गई हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव आठ फरवरी को हुए थे। मतगणना 70 विधानसभा क्षेत्रों में 21 स्थलों पर बनाए गए मतदान केंद्रों पर चल रही है।

मतगणना केंद्र पूर्वी दिल्ली के सीडब्ल्यूजी स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, पश्चिम दिल्ली के एनएसआईटी द्वारका, दक्षिणपूर्वी दिल्ली के मीराबाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी और जी बी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी, मध्य दिल्ली में सर सी वी रमण आईटीआई, धीरपुर और उत्तरी दिल्ली के बवाना में राजीव गांधी स्टेडियम एवं अन्य स्थानों पर स्थापित किए गए हैं। शनिवार को हुए मतदान के बाद 593 पुरुष उम्मीदवारों और 79 महिला प्रत्याशियों की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में कैद हो गयी थी।

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सोमवार, 16 दिसंबर 2019

Ravish kumar ne kya kha hai modi sarkar ke liye



आप जानते हैं कि अर्थव्यवस्थाओं की ज़रूरत हर दिन बदल रही है. आज किया गया सुधार कल पुराना पड़ जाता है. दुनिया में कब कौन सा देश कैसी नीति लेकर आ जाए और प्रतिस्पर्धा की शर्तें बदल दे पता नहीं मगर अमिताभ कांत को सब पता hai

फिर से दूरगामी परिणामों का बात हुई है. इस बार दूरगामी परिणाम अगले तीस चालीस साल में दिखने का एलान हुआ है. नीति आयोग के सी ई ओ अमिताभ कांत ने कहा है कि पिछले कुछ सालों में भारत में जो सुधार किए गए हैं उनकी बुनियाद पर भारत की कहानी अब शुरू होती है. जो अगले तीस चालीस सालों में दिखेगी. कितने आराम से अमिताभ कांत ने अगले तीस चालीस साल की भविष्यवाणी कर रहे हैं. प्रोपेगैंडा और पैंतरेबाज़ी की भी हद होती है. जब नोटबंदी आई तो कहा गया कि दूरगामी परिणाम अच्छे हुए. चार साल बाद जब उसी दूरगामी परिणाम को खोजा जा रहा है तो कहीं अता पता नहीं.

आप जानते हैं कि अर्थव्यवस्थाओं की ज़रूरत हर दिन बदल रही है. आज किया गया सुधार कल पुराना पड़ जाता है. दुनिया में कब कौन सा देश कैसी नीति लेकर आ जाए और प्रतिस्पर्धा की शर्तें बदल दे पता नहीं मगर अमिताभ कांत को सब पता है. उन्हें यह पता है कि जनता को क्या मालूम. इसलिए अभी संकट है तो तीस चालीस साल बाद का सपना दिखा दो.

कुछ महीने पहले तक इसी भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार थे अरविंद सुब्रमण्यन. अर्थव्यवस्था की थोड़ी बहुत पढ़ाई तो उन्होंने भी की होगी. वर्ना मोदी जी तो उन्हें सलाहकार बनाते नहीं. उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आई सी यू में है. सुब्रमण्यन और फेलमन ने एक पेपर लिखा है. दोनों हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं. अरविंद ने मौजूदा आर्थिक हालात को महासुस्ती (Great Slowdown) कहा है. उनका कहना है कि यह कोई सामान्य मंदी नहीं है. इसे समझाने के लिए उन्होंने बताया है कि किस तरह से भारत पर पहले से बैंकों के लोन का संकट बढ़ रहा था लेकिन नोटबंदी के बाद एक और संकट पैदा होता है जो उसे नीचे की ओर धकेल चुका है.

2004 से 2011 के दौरान स्टील सेक्टर, पावर सेक्टर और इंफ्रा सेक्टर को बहुत सारे लोन दिए गए जो बाद में नॉन परफार्मिंग एसेट बन गए. जिन्हें बैड लोन कहा जाता है. नोटबंदी के बाद प्राइवेट सेक्टर का लोन बढ़ता ही जा रहा है. जिसके कारण बैंकों पर दोहरा बोझ पड़ गया है. नोटबंदी के बाद नॉन बैकिंग फाइनेंस कंपनियां NBFC जैसे IL&FS बर्बाद हो गईं. नोटबंदी के बाद बहुत सारा कैश बैंकों में पहुंचा. बैंकों ने IL&FS को लोन देना शुरू कर दिया. IL&FS जैसी कंपनियों ने रीयल स्टेट को लोन देना शुरू कर दिया. और रीयल इस्टेट में क्या हुआ? क्योंकि लोगों के पास फ्लैट ख़रीदने के पैसे नहीं थे तो फ्लैट बिके ही नहीं. जून 2019 तक 8 शहरों में दस लाख फ्लैट बिना बिके हुए हैं. इनकी कीमत 8 लाख करोड़ बताई जाती है. चार साल में इतने फ्लैट बिकते हैं. लेकिन कोई बिका नहीं है. लिहाज़ा रीयल स्टेट को दिया हुआ लोन डूबने लगा. NBFC ने रीयल स्टेट को 5 लाख करोड़ के लोन दिए हैं. आधा पैसा बैड लोन हो चुका है. यानि डूब गया है. ज़ाहिर है इसका भार बैंकों पर पड़ेगा. जो बैंक उबरने जा रहे थे वे अब और डूबने लगे हैं. तो उन्होंने NBFC को लोन देना बंद कर दिया. जिनसे छोटे व मझोले उद्योग लोन लेते थे. उन्हें पैसा मिलना बंद हो गया. इस साल के पहले छह महीने में बैंकों ने करीब करीब न के बराबर लोन दिया. लिहाज़ा अर्थव्यवस्था की गाड़ी रूक गई.

अरविंद और फेलमन का कहना है कि भारत में 1991 में भयंकर संकट आया था. सरकार के पास पैसे नहीं थे. इस बार का संकट उससे भी गहरा है. अर्थव्यवस्था आई सी यू में पहुंच गई है. इसी संकट की एक सज़ा पंजाब महाराष्ट्र कारपोरेशन बैंक के खाताधारक भुगत रहे हैं. वे अभी भी सड़कों पर हैं लेकिन अब सब भूल चुके हैं. उनका पैसा डूब गया है. जब आपका भी डूबेगा तो ऐसे ही लोग चुप रहेंगे जैसे आज आप चुप हैं.

अगस्त से लेकर नवंबर तक भारत का निर्यात गिरा है. चमड़ा, जवाहरात, रेडीमेड गारमेंट. सबका निर्यात निगेटिव में है. ज़ाहिर है इसका असर कम कमाई वाले कर्मचारियों पर पड़ा होगा. उनकी नौकरियां जा रही होंगी. इसी तबको को उलझाए रखने के लिए हिन्दू मुस्लिम का एजेंडा ठेला जा रहा है. क्योंकि यह टापिक वाकई लोगों को उलझाता है. लोग घंटों बहस करते हैं. पूरा दिन निकल जाता है. यही नहीं आयात भी घटने लगा है. इस तरह पतन का एक चक्र बन गया है. इसका परिणाम जीएसटी संग्रह पर पड़ा है. केंद्र सरकार राज्यों को बकाया राशि नहीं दे पा रही है. कानून है कि अगर राज्यों का कर संग्रह 14 प्रतिशत की दर से नहीं बढ़ेगा तो जितना नहीं बढ़ेगा उतने का भुगतान केंद्र सरकार करेगी. इस तरह राज्यों का केंद्र सरकार पर 50,000 करोड़ का बकाया हो गया है. यह पैसा राज्यों में नहीं पहुंचेगा तो उनकी गाड़ी की रफ्तार धीमी होगी.

राज्य अपना हिस्सा मांग रहे हैं. कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. या जी एस टी काउंसिल की बैठक में जाकर बाहर निकल आएंगे. सरकार दूसरी तरफ जीएसटी बढ़ाने के लिए देख रही है कि वह किन चीज़ों की जीएसटी दरें बढ़ा सकती है. जीसटी दरों के स्लैब में क्या क्या बदलाव हो सकते हैं. इसी बीच सरकार ने हल्के से 21 दवाओं के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं. आफ जानते हैं कि भारत की शहरी और ग्रामीण आबादी का 15 प्रतिशत हिस्सा भी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में नहीं आता है. आगे बताने की ज़रूरत नहीं कि हर परिवार अपनी कमाई का 10 से 25 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च कर रहा है. जिसके कारण वह गरीब है तो गरीबी रेखा से नीचे चला जाता है और मध्यम वर्ग का है तो ग़रीबी रेखा पर आ जाता है.

सरकार के पास पैसे नहीं है. ज़ाहिर है सरकार अपना संसाधन बेचेगी. पावर सेक्टर में भी यही हो रहा है. पेट्रोलियम सेक्टर में भी यही हो रहा है. पावर सेक्टर के 15 लाख कर्मचारी अब जागे हैं. अभी तक वे टीवी के फैलाए एजेंडा में मस्त थे. आज भी ज्यादातर हिन्दू मुस्लिम डिबेट में जितना हिस्सा लेते होंगे उसका आधा भी आर्थिक नीतियों पर नहीं खपाते होंगे. खैर अब जब ये 8 जनवरी को हड़ताल करेंगे तो देख लेंगे कि 15 लाख होकर भी इनकी कीमत शून्य हो गई है. मैं कई बार कह चुका हूं. भारत का लोकतंत्र बदल गया है. यह अब संख्या का कोई महत्व नहीं रहा. हर संख्या दूसरे बड़े समूह से खारिज हो जाती है.

देश के प्रधानमंत्री प्रदर्शनकारियों के कपड़े की तरफ इशार करते हैं. ज़ाहिर है उनका इरादा यही है. आफको ग़लत भी नहीं लगेगा क्योंकि प्रधानमंत्री का तो विकल्प नहीं है. मगर अंतरात्मा बची होती तो झारखंड चुनाव में दिए गए उनके बयान का मतलब आसानी से समझ लेते. सीधे नाम न लो मगर इशारे इशारे में लोगों के उस ख्याल को बड़ा करो जो उन्हें हिन्दू मुस्लिम डिबेट का दर्शक बनाती है. उपभोक्ता बनाती है. समर्थक बनाती है. नागरिक को मुर्गा बनाती है. नागरिक खत्म हो जाता है. नेता मुर्गा फ्राई कर खा जाता है. आप मुर्गा बन चुके हैं.

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.ती है. जो अगले तीस चालीस सालों में दिखेगी. कितने आराम से अमिताभ कांत ने अगले तीस चालीस साल की भविष्यवाणी कर रहे हैं. प्रोपेगैंडा और पैंतरेबाज़ी की भी हद होती है. जब नोटबंदी आई तो कहा गया कि दूरगामी परिणाम अच्छे हुए. चार साल बाद जब उसी दूरगामी परिणाम को खोजा जा रहा hai चमड़ा, जवाहरात, रेडीमेड गारमेंट. सबका निर्यात निगेटिव में है. ज़ाहिर है इसका असर कम कमाई वाले कर्मचारियों पर पड़ा होगा. उनकी नौकरियां जा रही होंगी. इसी तबको को उलझाए रखने के लिए हिन्दू मुस्लिम का एजेंडा ठेला जा रहा है. क्योंकि यह टापिक वाकई लोगों को उलझाता है. लोग घंटों बहस करते हैं. पूरा दिन निकल जाता है. यही नहीं आयात भी घटने लगा है. इस तरह पतन का एक चक्र बन गया है. इसका परिणाम जीएसटी संग्रह पर पड़ा है. केंद्र सरकार राज्यों को बकाया राशि नहीं दे पा रही है. कानून है कि अगर राज्यों का कर संग्रह 14 प्रतिशत की दर से नहीं बढ़ेगा तो जितना नहीं बढ़ेगा उतने का भुगतान केंद्र सरकार करेगी. इस तरह राज्यों का केंद्र सरकार पर 50,000 करोड़ का बकाया हो गया है. यह पैसा राज्यों में नहीं पहुंचेगा तो उनकी गाड़ी की रफ्तार धीमी होगी.

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